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Monday, 3 September 2018

अध्याय सात

प्रिया हल्के कदमो से कमरे के भीतर दखिल हुई । रीमा गहरी  नींद में सो रही थी | रीमा को देख कर सोच  पड़ गयी, आख़िर कब तक इसे ये सब झेलना होगा | सोचते सोचते  प्रियंका की भी आँख लग गयी |
" प्रियंका, उठो..." प्रियंका की आँख खुली तो देखा रीमा तैयार खड़ी थी सामने, "चलना नहीं क्या तुम्हे" रीमा ने कहा, "...... सब तैयार हो चुके है..... चलो तुम भी जल्दी तैयार हो जाओ..." "  चलो मैं बस १० मिनट में आई" प्रियंका  तैयार होने चली गयी।

" वो देखो.....कितना खूबसूरत नज़ारा है....प्रिया"  रीमा ने प्रियंका को बस की खिड़की से बाहर देखने को इशारा किया।"क्या तुम्हे कुछ भी याद नहीं है रीमा.....की कल ......" वरुण अपना वाक्य पूरा कर पता इससे पहले प्रियंका ने उसे इशारा किया। "...कल हमने क्या नहीं देखाउसके आगे तो यह कुछ भी नहीं ...." वरुण ने हस कर  अपनी बात का रुख मोड़ा।

बस से  उतरते समय वरुण ने प्रियंका को पीछे रोका, " हम रीमा से ये सच कब तक  छुपाते रहेंगे.....उसे बताना होगा उसके साथ क्या हो रहा है...."  "वरुण , रीमा को पता है की वो रात में चीख़ी थी...... पर उसे ये आज तक नहीं याद रहा है की वो किस कारण से इतनी बुरी तरह चीखती है......" प्रियंका ने वरुण को आगे समझाया, " और मैंने तुम्हे इशारा इसी लिए किया की जब उसे याद ही नहीं की वो किस कारण चीखती है तो उसे याद दिलाने का और दुखी करने का कोई मतलब नहीं है | " वरुण ने सर हिला कर हामी भरी। 

" चलो भी अब तुम दोनों....बाकि ग्रुप को भी थोड़ा समय दो...." स्वाति ने पीछे से आ कर दोनों को चौंका दिया। "हाँ स्वाति चलो.....आज तुम्हे ही पूरा समय दे देता हूँ..." वरुण ने मुँह बना कर  कहा और स्वाति से साथ आगे बढ़ा।  पीछे प्रियंका की ओर  देख कर उसने मुस्कुराया और फिर आगे बढ़ गया।

" आज बहुत थक गए ना प्रिया ?..... पर ख़रीदारी भी सही हो गयी.....मज़ा आया..... " रीमा ने बिस्तर पर पैर फैलते हुए कहा।  " हाँ थकान तो हो गयी है..... बस अब सीधे सुबह ही उठेंगे....." प्रियंका ने हस  कर कहा। " वो तो मैं नहीं कह सकती....आज रात कैसी बीते !" रीमा ने दुखी स्वर में कहा। 

Sunday, 13 May 2018

अध्याय: पांच

"तुम्हारे कहने का मतलब क्या है प्रियंका?" वरुण ने असमंजस जताते हुए कहा | थोडा रुक के वरुण बोला, " एक ही सपना रीमा को बार बार आता है?...... इतने साल बीत गये , और एक ही सपना ? ..... बात कुछ समझ नहीं आई मुझे "

प्रियंका ने सर नीचे झुकाया और बोली, " वरुण मुझे इतना ही पता है, ज्यादा नहीं जानती मैं |" और वो उठ के वापस जाने लगी | वरुण ने पुनः उसका रास्ता रोका, " प्रियंका बात को अधूरा मत छोड़ो, शायद मैं तुम्हारी कुछ मदद ही कर पाऊं|" प्रियंका ने सर उठा के वरुण की ओर देखा, उसे वरुण की आँखों एक विश्वास की चमक सी दिखाई दी|

वो ठहर गयी, वरुण की ओर देखा, और बोली, " रीमा कई दिन तक चैन से सोयी | स्थिति पहले की तरह सामान्य हो गयी | रीमा के पिताजी प्रसन्न थे, उनकी बेटी वापस गहरी नींद सोने लगी थी| पहली रात्री जब वो नहीं चीखी , तो रीमा के पिताजी ने सोचा कुछ दिन और देख लेते है, डॉक्टर को दिखने जाने का उन्हें कोई तथ्य नहीं महसूस हुआ |"

"धीरे धीरे घरवाले भूल गये, सब कुछ सामान्य हो गया | कुछ साल बीत गये, रीमा थोड़ी और बड़ी हो गयी | एक दोपहर वो स्कूल से लौटी, तो उसके मुख पर कोई अभिव्यक्ति नहीं थी | वो ना कुछ बोली, ना कोई भाव भंगिमा , खाना खा कर अपने कमरे में चली गयी|" प्रियंका एकदम से रुकी, उसे किसी के आस पास होने का आभास हुआ | वरुण ने प्रियंका को आश्वासन दिया, " कोई नहीं है प्रिया...... मेरा मतलब प्रियंका " वरुण का चेहरा लाल हो गया |




" नहीं वरुण, मुझे ऐसा लग रहा है, कोई हैं यहाँ.....कोई हमारी बातें सुन रहा.."